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Friday, 24 April 2015

आखिर क्यों


**हर चेहरे पर एक चेहरा

हर पल बदलता मिजाज़

हर हाँ में छुपी एक ना

हर मोड़ पर पीछे मुड़ कर देखना

हर कदम पर बदलती मंजिल

हर रास्ते पर गलियों की तलाश

हर साँस पर घुटता दम

हर चुप्पी पर चीखने की चाह

हर जरूरत पर बदलती फितरत

हर उम्मीद के साथ नाउम्मीदी का डर


~मनीषा शर्मा

4 comments:

  1. "हर साँस पर घुटता दम
    हर चुप्पी पर चीखने की चाह"- wow

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    1. शुक्रिया Dayanand :)

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